‘कारक’, ‘पक्ष’, ‘सङ्केतार्थ’, ‘पदावली’: यस पुस्तकमा व्याकरणका सयौँ पारिभाषिक शब्द आउँछन्, र अङ्ग्रेजीमा लेखिएका व्याकरण वा भाषाविज्ञानका पुस्तक पढ्दा तिनलाई अर्कै नामले चिन्नुपर्छ। एउटै कुरालाई सबै व्याकरणविद्ले एउटै नाम पनि दिँदैनन्, र कहिलेकाहीँ नियममै मत फरक पर्छ। यो परिशिष्ट यस्ता कुराको एकै ठाउँमा राखिएको सूची हो।
पहिलो भागमा अध्यायहरूले परिभाषा दिएका शब्द शब्दकोशको क्रममा छन् (क्रमको नियम शब्दकोशको प्रयोग अध्यायमा छ), हरेकको अङ्ग्रेजी नाम र त्यसको परिभाषा भएको अध्यायको खण्डमा पुग्ने लिङ्कसहित। दोस्रो भागमा अध्यायहरूका ‘मत फरक छ’ बाकसका कुरा छोटकरीमा छन्। हरेक पङ्क्तिको कक्षा त्यो कुरा पढाइने खण्डकै कक्षा हो।
व्याकरणका पारिभाषिक शब्द, नेपाली–अङ्ग्रेजी
अङ्ग्रेजी नाम अङ्ग्रेजीमा लेखिएका नेपाली व्याकरण र भाषाविज्ञानमा चल्ने नाम हुन्। संस्कृत व्याकरणबाट आएका केही नामको अङ्ग्रेजीमा छुट्टै अनुवाद चल्दैन, त्यसैले तिनको संस्कृत नाम नै रोमन अक्षरमा दिइएको छ (sandhi, kāraka, tatsama)। जसको अङ्ग्रेजीमा स्थिर नाम छैन, त्यहाँ ‘no settled English term’ लेखेर अर्थ मात्र दिइएको छ। ‘अर्को नाम’ मा पाठ्यपुस्तक, विशिष्टीकरण तालिका वा अधिकारीको व्याकरणले दिएका अर्का नाम छन्।
स्वरबाट सुरु हुने शब्द (अ–औ)
| शब्द | अङ्ग्रेजीमा | अर्को नाम |
|---|---|---|
| अंशवाचक | fractional (numeral) | |
| अकरण | negative form | |
| अकर्मक | intransitive | |
| अकर्मकीकरण | detransitivization | |
| अक्षर | syllable | |
| अक्षरको सीमा | syllable boundary | |
| अक्षरीकरण | syllabification | |
| अगोलित | unrounded | |
| अग्र | front (vowel) | |
| अघोष | voiceless | |
| अजन्त | vowel-final (word or syllable) | |
| अज्ञात पक्ष | evidential or mirative past (the -एछ past: news to the speaker); no single settled English term | अज्ञात भूत |
| अधिकरण | location (adhikaraṇa) | |
| अनिश्चयवाचक सर्वनाम | indefinite pronoun | |
| अनुकरणात्मक शब्द | onomatopoeic (imitative) word | |
| अनुनासिक स्वर | nasal (nasalized) vowel | |
| अनुरोधार्थ | request form; no settled English term | |
| अनेकार्थी शब्द | polysemous word (one word, many meanings) | |
| अनौपचारिक भाषा | informal language, informal register | |
| अन्तर्राष्ट्रिय ध्वनितात्त्विक वर्णमाला | International Phonetic Alphabet (IPA) | |
| अन्वयान्तर | paraphrase (two sentences, one meaning) | |
| अपरिभाषक उपवाक्य | non-restrictive (relative) clause | |
| अपादान | source, point of separation (apādāna) | |
| अपूर्ण पक्ष | progressive (imperfective) aspect | |
| अप्रत्यक्ष कथन | indirect (reported) speech | |
| अप्रत्यक्ष कर्म | indirect object | |
| अभूत काल | non-past tense | |
| अभ्यस्त पक्ष | habitual aspect | अभ्यस्त भूत |
| अयादि सन्धि | ayādi sandhi (Sanskrit name kept) | |
| अयोगवाह | ayogavāha (anusvāra and visarga, neither vowel nor consonant) | |
| अर्धविराम | semicolon (;) | |
| अर्धविवृत | open-mid vowel | |
| अर्धसंवृत | close-mid vowel | |
| अर्धस्वर | semivowel (approximant) | |
| अलुक् समास | aluk compound (keeps its case ending) | अलोपको स्थिति (अधिकारी: छुट्टै समास होइन) |
| अल्पप्राण | unaspirated | |
| अल्पविराम | comma (,) | |
| अवधारक | emphatic (focus) particle | |
| अविकारी | indeclinable word classes | |
| अव्यय | indeclinable (word) | अव्ययवर्ग |
| अव्ययीभाव समास | adverbial compound (avyayībhāva) | |
| अव्यावर्तक | non-restrictive (adjective) | |
| अव्युत्पन्न धातु | primary root | |
| असङ्ख्येय | uncountable (noun) | |
| असमापक क्रिया | non-finite verb | असमापिका |
| असमापिका उपवाक्य | non-finite clause | |
| आंशिक द्वित्व | partial reduplication | |
| आगन्तुक उपसर्ग | borrowed prefix | |
| आगन्तुक शब्द | loanword | |
| आज्ञार्थ | imperative (mood) | |
| आज्ञार्थक वाक्य | imperative sentence | |
| आदर | honorific (level of respect) | |
| आदर सङ्गति | honorific agreement | |
| आधारपद | base (stem) | आधार, आधार तत्त्व (अधिकारी) |
| आलङ्कारिक पदक्रम | stylistic (literary) word order | विशिष्ट पदक्रम |
| आवृत्तिवाचक | multiplicative (numeral) | |
| आश्रित उपवाक्य | subordinate clause | |
| आश्रित वाक्य | subordinate (dependent) sentence | |
| इच्छार्थ | optative (mood); Wikipedia’s Nepali grammar tables call these forms injunctive | |
| इच्छार्थक वाक्य | optative sentence | |
| उखान | proverb | |
| उच्च आदर | high-honorific grade | |
| उच्चतम आदर | highest (royal) honorific grade (Adhikari) | |
| उच्चतर आदर | higher-honorific grade (Adhikari) | |
| उच्चारण अवयव | organs of speech | |
| उच्चारण स्थान | place of articulation | |
| उत्तम पुरुष | uttama puruṣa, the first person in Sanskrit grammar | |
| उत्तरपद | second (final) member | |
| उद्गार चिह्न | exclamation mark (!) | |
| उद्देश्य | subject (uddeśya) | |
| उद्देश्य भाग | subject part | उद्देश्य खण्ड |
| उद्देश्य विशेषण | attributive adjective | |
| उद्देश्य विस्तार | extension of the subject | |
| उपवाक्य | clause | |
| उपसर्ग | prefix | |
| एककर्मक | monotransitive | |
| एकवचन | singular | |
| एकोहोरो उद्धरण चिह्न | single quotation marks (‘ ’) | |
| ओष्ठ्य | labial (bilabial) | |
| औपचारिक भाषा | formal language, formal register |
क वर्ग (क–ङ)
| शब्द | अङ्ग्रेजीमा | अर्को नाम |
|---|---|---|
| कण्ठ्य | velar | |
| कथन | speech (narration) | उक्ति |
| कथन अंश | reported part (the quoted words) | |
| कथयिता अंश | reporting part | |
| कथ्य रूप | colloquial (spoken) form | |
| कथ्य वर्ण | spoken sounds (phonemes) | |
| कम्पित | trill (flap) | |
| करण (क्रियापद) | affirmative (positive) form | |
| करण (कारक) | instrument (karaṇa) | |
| कर्ता | agent, subject (kartā) | |
| कर्तृ पूरक | subject complement | |
| कर्तृवाच्य | active voice | |
| कर्म | object (karma) | |
| कर्म पूरक | object complement | |
| कर्मधारय समास | descriptive compound (karmadhāraya) | |
| कर्मवाच्य | passive voice | |
| काकु | a tone of voice that changes a sentence’s meaning (a statement said as a question, praise said as blame); no settled English term | |
| कारक | case relation (kāraka) | |
| कारणबोधक क्रियायोगी | adverb of reason | |
| काल | tense | |
| काल व्यतिक्रम | tense shift (one tense’s form used for another time); no settled English term | |
| कृत् प्रत्यय | primary suffix (kṛt), added to a verb root | |
| कृदन्त | primary derivative (kṛdanta), a word made from a root; in sentences, a participle | |
| कृदन्तीय क्रियायोगी | participial adverb (converb) | |
| केन्द्रीय (स्वर) | central (vowel) | |
| केन्द्रीय भाग | nucleus (of a syllable) | |
| कोटिकर | classifier (-ओटा, जना) | |
| कोशीय क्रम | dictionary order | शब्दकोशीय अनुक्रम |
| कोष्ठक | brackets, parentheses | |
| क्रमवाचक | ordinal (numeral) | |
| क्रिया पदावली | verb phrase | |
| क्रियापद | verb (as used in a sentence) | |
| क्रियामूल | infinitive, the dictionary form in -नु | |
| क्रियायोगिक उपवाक्य | adverbial clause | |
| क्रियायोगी | adverb | क्रियाविशेषण |
| क्रियायोगी पदावली | adverb phrase | |
| क्रियार्थक नाम | verbal noun (the -नु, -ने form used as a noun) | |
| गणनावाचक | cardinal (numeral) | |
| गुण सन्धि | guṇa sandhi (Sanskrit name kept) | |
| गुणबोधक विशेषण | qualitative adjective | |
| गोलित | rounded | |
| घोष | voiced |
च वर्ग र ट वर्ग (च–ण)
| शब्द | अङ्ग्रेजीमा | अर्को नाम |
|---|---|---|
| चन्द्रविन्दु | candrabindu, the nasalization sign (ँ) | |
| छुट चिह्न | caret (^) | कागपादे |
| जटिल वाक्य | in Grade 10’s book, compound or complex sentence | |
| जटिल शब्द | complex word (a root with affixes) | |
| जातिवाचक नाम | common noun | |
| टुक्का | idiom |
त वर्ग (त–न)
| शब्द | अङ्ग्रेजीमा | अर्को नाम |
|---|---|---|
| तत्पुरुष समास | determinative compound (tatpuruṣa) | |
| तत्सम उपसर्ग | Sanskrit prefix | |
| तत्सम शब्द | tatsama, a Sanskrit word used unchanged | |
| तद्धित प्रत्यय | secondary suffix (taddhita), added to a word | |
| तद्धितान्त | secondary derivative (taddhitānta) | |
| तद्भव उपसर्ग | native (tadbhava) prefix | |
| तद्भव शब्द | tadbhava, a word inherited from Sanskrit in changed form | |
| तान | intonation (the voice rising and falling over a sentence) | स्वराघात |
| तालव्य | palatal | |
| तिङन्त | tiṅanta, a finite verb form | |
| तिङ् | tiṅ, the finite verb endings (Sanskrit term) | |
| तिर्यक् चिह्न | slash (/) | विकल्पबोधक चिह्न |
| तिर्यक् रूप | oblique form (case) | तिर्यक् कारक |
| तुलनात्मक क्रियायोगी | comparative adverb | |
| तृतीय पुरुष | third person | |
| दन्तमूलीय | alveolar | वर्त्स्य |
| दन्त्य | dental | |
| दर्शकवाचक सर्वनाम | demonstrative pronoun | |
| दीर्घ सन्धि | savarṇa-dīrgha sandhi (Sanskrit name kept) | |
| देशज | deśaja, native word of unknown source (Hindi grammars) | |
| दोहोरो उद्धरण चिह्न | double quotation marks (“ ”) | |
| द्रव्यवाचक नाम | mass (material) noun | |
| द्वन्द्व समास | copulative (co-ordinative) compound (dvandva) | |
| द्विकर्मक | ditransitive | |
| द्विगु समास | numerative compound (dvigu) | |
| द्वितीय पुरुष | second person | |
| द्वित्व | reduplication | |
| द्वित्व विच्छेद | splitting a reduplicated word; no settled English term | |
| द्वित्व शब्द | reduplicated word | द्विरुक्त शब्द |
| द्विस्वर | diphthong | |
| द्वैध सदस्यता | dual membership (of two word classes) | |
| धातु | verb root | |
| ध्रुवीयता | polarity | |
| नाम | noun | |
| नाम उपवाक्य | noun clause | |
| नाम धातु | denominative root | |
| नाम पदावली | noun phrase | |
| नाम स्थानिक विशेषण | adjective standing in a noun’s place | |
| नामयोगी | postposition | |
| नामयोगी पदावली | postpositional phrase | |
| नासिक्य | nasal (consonant) | |
| निजवाचक सर्वनाम | reflexive pronoun | |
| निपात | particle | |
| निरपेक्ष संयोजक | coordinating conjunction | |
| निर्देश चिह्न | dash (—) | निर्देशक |
| निर्माण प्रक्रिया | writing out how a word is formed (base + affix); no settled English term | |
| निहितार्थ | entailment (what follows from a sentence being true) |
प वर्ग (प–म)
| शब्द | अङ्ग्रेजीमा | अर्को नाम |
|---|---|---|
| उपपद | a bound member of a compound that works almost like a suffix (-ज्ञ, -कार); no settled English term | प्रत्ययधर्मी उपपद |
| पक्ष | aspect | |
| पद | word as used in a sentence (pada) | |
| पदक्रम | word order | |
| पदक्रम विचलन | change of word order, inversion | |
| पदयोग | writing words joined; no settled English term | |
| पदवर्ग | part of speech, word class | शब्दवर्ग |
| पदवर्ग विचलन | word-class shift (conversion) | सदस्यता विचलन, वर्ग परिवर्तन (अधिकारी) |
| पदवियोग | writing words apart; no settled English term | |
| पदावली | phrase | |
| पदेन | subscript r (क्र); no settled English term | |
| परसर्ग | suffix (so in CDC’s linguistics course; in Hindi grammar परसर्ग means a postposition) | प्रत्यय |
| परिधीय भाग | margin (onset and coda) | |
| परिपूरक वितरण | complementary distribution (two sounds that never come in the same place) | |
| परिभाषक उपवाक्य | restrictive (relative) clause | |
| परिमाणबोधक क्रियायोगी | adverb of degree | |
| परिमाणबोधक विशेषण | quantitative adjective | |
| परिवर्तित द्वित्व | reduplication with change, echo word (भातसात) | आपरिवर्तित द्वित्व |
| पर्यायवाची शब्द | synonym | |
| पश्च | back (vowel) | |
| पारस्परिक सर्वनाम | reciprocal pronoun | |
| पारिभाषिक शब्द | technical term | |
| पार्श्विक | lateral | |
| पुरुष | person | |
| पुरुष सङ्गति | person agreement | |
| पुरुषवाचक सर्वनाम | personal pronoun | |
| पुलिङ्ग | masculine | |
| पूरक | complement | |
| पूरकापेक्षी | copular (complement-taking) verb | |
| पूर्ण द्वित्व | full reduplication | |
| पूर्ण पक्ष | perfect aspect | |
| पूर्णविराम | full stop (।) | |
| पूर्णार्थ शब्द | content word | |
| पूर्वपद | first member (of a compound) | |
| पूर्वसर्ग | prefix | उपसर्ग |
| प्रकार्यात्मक शब्द | function word | |
| प्रत्यक्ष कथन | direct speech | |
| प्रत्यक्ष कर्म | direct object | |
| प्रत्यय | suffix | |
| प्रथम पुरुष | first person | |
| प्रधान वाक्य | main (principal) sentence | |
| प्रयत्न | manner of articulation | |
| प्रयुक्ति | register (the language of a field or an occasion) | |
| प्रविष्टि | (dictionary) entry | |
| प्रश्नवाचक चिह्न | question mark (?) | |
| प्रश्नवाचक सर्वनाम | interrogative pronoun | |
| प्रश्नार्थ | interrogative (form) | |
| प्रश्नार्थक वाक्य | interrogative sentence | |
| प्राविधिक शब्द | technological (trade) term | |
| प्रेरक | causer | |
| प्रेरणार्थक क्रिया | causative verb | |
| प्रेरणार्थक धातु | causative root | |
| प्रेर्य | causee | |
| बद्ध आधार | bound base (bound root) | बद्ध आधार तत्त्व (अधिकारी) |
| बद्ध रूपिम | bound morpheme (comes only joined to another) | |
| बलाघात | stress (the syllable said with more force) | आघात |
| बहुवचन | plural | |
| बहुव्रीहि समास | possessive, exocentric compound (bahuvrīhi) | |
| भविष्यत् काल | future tense | |
| भारोपेली | Indo-European (language family) | |
| भाव | mood | |
| भाववाचक नाम | abstract noun | |
| भाववाच्य | impersonal voice, impersonal passive | |
| भाषा | language | |
| भाषा परिवर्तन | language change | |
| भाषिका | dialect | |
| भूत काल | past tense | |
| भेदक | possessor, possessive modifier (genitive) | |
| भेदक विशेषण | possessive adjective | |
| भेद्य | the possessed noun (head) | |
| मध्यम आदर | middle (mid-honorific) grade | |
| मध्यम पुरुष | madhyama puruṣa, the second person in Sanskrit grammar | |
| मध्यसर्ग | infix | |
| महाप्राण | aspirated | |
| मात्रा | vowel sign (mātrā) | |
| मानक भाषा | standard language | |
| मानवीकरण | personification | |
| मानवीय | human (noun) | |
| मानवेतर | non-human (noun) | |
| मिश्र वाक्य | complex sentence | |
| मुक्त रूपिम | free morpheme (can stand alone as a word) | |
| मुख्य उपवाक्य | main clause | |
| मूर्धन्य | retroflex (cerebral) | |
| मूल शब्द | simple (underived) word | अव्युत्पन्न शब्द (अधिकारी) |
| मौलिक शब्द | native word (from Sanskrit, unchanged or changed: tatsama or tadbhava), as against a loanword; no settled English term |
य, र, ल, व (य–व)
| शब्द | अङ्ग्रेजीमा | अर्को नाम |
|---|---|---|
| यण् सन्धि | yaṇ sandhi (Sanskrit name kept) | |
| युगल संयोजक | correlative conjunction | |
| योजक चिह्न | hyphen (-) | |
| यौगिक शब्द | compound word (two or more roots) | |
| राष्ट्रभाषा | national language (Constitution of Nepal, Art. 6) | |
| रीतिबोधक क्रियायोगी | adverb of manner | |
| रूप (रूपविज्ञान) | morph (a piece of a word as it is said or written) | |
| रूपायक प्रत्यय | inflectional suffix | |
| रूपायन | inflection | |
| रूपिम | morpheme (the smallest part of a word that carries a meaning or a grammatical job) | |
| रेफ | repha, the r written above (र्क) | |
| लघुतावाची शब्द | unit word (a bit or piece of); no settled English term | |
| लिङ्ग | gender | |
| लिङ्ग सङ्गति | gender agreement | |
| लिपि | script (writing system) | |
| लेख्य चिह्न | punctuation marks | |
| लेख्य वर्ण | written letters (graphemes) | |
| लोप चिह्न | ellipsis (...) | |
| वचन | number | |
| वचन सङ्गति | number agreement | |
| वर्ण | speech sound, letter (varṇa); in phonology, phoneme | |
| वर्णविन्यास | orthography, spelling rules | |
| वर्णानुक्रम | alphabetical order | |
| वर्तमान काल | present tense | |
| वाक्य विश्लेषण | sentence splitting (analysis) | |
| वाक्य संश्लेषण | sentence combining (synthesis) | |
| वाक्यात्मक कार्य | syntactic function | |
| वाक्यात्मक क्रियायोगी | sentence adverb | |
| वाक्यात्मक प्रेरणार्थक | periphrastic causative (-न लगाउनु) | -न लगाउनु |
| वाक्यान्तरण | sentence transformation | वाक्य परिवर्तन |
| वाच्य | voice | |
| विकारी | declinable (inflecting) word classes | |
| विग्रह | analysis (paraphrase) of a compound (vigraha) | |
| विदेशज | videśaja, foreign loanword (Hindi grammars) | |
| विधानार्थक वाक्य | declarative sentence | |
| विधेय | predicate (vidheya) | |
| विधेय भाग | predicate part | विधेय खण्ड |
| विधेय विशेषण | predicative adjective | |
| विधेय विस्तार | extension of the predicate | |
| विध्यर्थ | Adhikari’s mood joining imperative and optative; no settled English term (injunctive is the nearest: Wikipedia’s tables use it for most of these forms; Adhikari’s own list gives imperative) | |
| विपरीतार्थी शब्द | antonym | |
| विभक्त वाक्य | cleft sentence | |
| विभक्ति | case marker (vibhakti) | |
| विभेदक वर्ण | distinctive sound (shown by minimal pairs) | |
| विरोधार्थ | contradiction (two sentences that cannot both be true) | |
| विवरण चिह्न | colon (:) | |
| विवृत | open (low) vowel | |
| विशेषण | adjective | |
| विशेषण पदावली | adjective phrase | |
| विशेष्य | the noun an adjective qualifies (head noun) | |
| विश्लेषित वाक्य | split sentences | |
| विसर्ग सन्धि | visarga sandhi | |
| विस्तारक | modifier (expansion) | |
| विस्मयादिबोधक | interjection | |
| वृद्धि सन्धि | vṛddhi sandhi (Sanskrit name kept) | |
| व्यक्ति बोली | idiolect (one person’s own way of speaking) | |
| व्यक्तिवाचक नाम | proper noun | |
| व्यञ्जन | consonant | |
| व्यञ्जन सन्धि | consonant sandhi | |
| व्यञ्जनको संयुक्तता | consonant cluster | व्यञ्जन गुच्छ |
| व्यञ्जनान्त धातु | consonant-final root | |
| व्यतिरेकी वितरण | contrastive distribution (two sounds that can tell words apart) | |
| व्याकरण | grammar | |
| व्याकरणात्मक अर्थ | grammatical meaning | |
| व्याकरणिक कोटि | grammatical category | |
| व्याकरणिक पदक्रम | grammatical (normal) word order | सामान्य पदक्रम |
| व्यावर्तक | restrictive (adjective) | |
| व्युत्पन्न धातु | derived root | |
| व्युत्पन्न शब्द | derived word | |
| व्युत्पादक प्रत्यय | derivational suffix | |
| व्युत्पादन | derivation |
श, ष, स, ह (श–ह)
| शब्द | अङ्ग्रेजीमा | अर्को नाम |
|---|---|---|
| शब्दकोश | dictionary | |
| शब्दस्रोत | word origin, etymological source | |
| शाब्दिक अर्थ | lexical meaning | |
| शिथिलता | cluster breaking (by an inserted vowel); no settled English term | |
| शीर्ष | head (of a phrase) | |
| शीर्ष शब्द | headword | |
| शुद्धीकरण | correcting errors in words and sentences | शब्दशुद्धि |
| शून्य विभक्ति | zero case marker | निर्विभक्तिक (अधिकारी) |
| श्रुतिसमभिन्नार्थी शब्द | near-homophone (sounds alike, different meaning) | |
| षष्ठी | genitive (ṣaṣṭhī), not a kāraka | |
| संयुक्त अक्षर | conjunct (consonant cluster written as one letter) | |
| संयुक्त क्रिया | compound verb | |
| संयुक्त वाक्य | compound sentence | |
| संयोजक | conjunction | |
| संरूप | allomorph (one morpheme’s different forms) | |
| संवर्ण | allophone (one वर्ण said as two sounds, by where it comes) | |
| संवृत | close (high) vowel | |
| संश्लिष्ट वाक्य | Adhikari’s term for a sentence with non-finite clauses | |
| संश्लेषित वाक्य | combined sentence | |
| सकर्मक | transitive | |
| सङ्केतार्थ | conditional (mood) | |
| सङ्क्षिप्त शब्द | abbreviation | |
| सङ्क्षेप चिह्न | abbreviation point (.) | |
| सङ्ख्याबोधक विशेषण | numeral adjective | सङ्ख्यावाचक (अधिकारी) |
| सङ्ख्येय | countable (noun) | |
| सङ्गति | agreement (concord) | पदसङ्गति |
| सङ्घर्षी | fricative | |
| सन्दर्भ निर्देशी | referring word, one that points to something named in the text or present in the situation (Adhikari’s list: deictic) | |
| सन्दर्भगत अर्थ | contextual meaning | |
| सन्धि | sandhi (euphonic combination) | |
| सन्धि विच्छेद | undoing a sandhi (splitting into its parts) | |
| सन्धियुक्त शब्द | word formed by sandhi | |
| समध्वन्यात्मक | homophony (one sound, different words) | |
| समयबोधक क्रियायोगी | adverb of time | |
| समरूपात्मक | homonymy (one form, different meanings) | समरूपी |
| समलिप्यात्मक | homography (one spelling, different words) | |
| समस्त शब्द | compound word | |
| समापक क्रिया | finite verb | समापिका |
| समावेशक शब्द | superordinate word, hypernym | |
| समावेश्य शब्द | subordinate word, hyponym | |
| समास | compound (samāsa) | |
| समासमध्य प्रत्यय | a suffix inside a compound (the ए of चैते धान); no settled English term | |
| समासान्त प्रत्यय | samāsānta, a suffix closing a compound (the ए of लामखुट्टे) | |
| समूहवाचक नाम | collective noun | समुदायवाचक (अधिकारी) |
| समूहवाची शब्द | collective word | |
| सम्पर्क भाषा | link language, lingua franca | |
| सम्प्रदान | recipient, beneficiary (sampradāna) | |
| सम्बद्धात्मक विशेषण | relational adjective | |
| सम्बन्ध बोधक उपवाक्य | relative clause | |
| सम्बन्धवाचक संयोजक | relative conjunction (जो … त्यो) | |
| सम्बन्धवाचक सर्वनाम | relative pronoun | |
| सम्भावनार्थ | probable future (Wikipedia’s name for these forms); no single settled English term for the mood | |
| सरकारी कामकाजको भाषा | official language (Art. 7) | |
| सरल रूप | direct form (case) | सरल कारक |
| सरल वाक्य | simple sentence | |
| सरल शब्द | simple word (a single morpheme) | |
| सर्ग व्युत्पादन | affixation (Adhikari: derivation by prefix or suffix) | |
| सर्वनाम | pronoun | |
| सहायक क्रिया | auxiliary verb | |
| साङ्केतिक भाषा | sign language | |
| सापेक्ष संयोजक | subordinating conjunction | |
| सामाजिक भेद | social variety, sociolect | |
| सामान्य आदर | non-honorific (low) grade | आदर रहित (अधिकारी) |
| सामान्य धातु | simple (non-causative) root | |
| सामान्य पक्ष | simple (unmarked) aspect: the school books count the simple forms as an aspect; no settled English term for it as an aspect | |
| सामान्यार्थ | indicative (mood) | |
| सामान्यार्थक | non-causative (verb) | |
| सार्वनामिक विशेषण | pronominal adjective | |
| सिङ्गो शब्द | one-word substitute | |
| स्त्रीलिङ्ग | feminine | |
| स्थानबोधक क्रियायोगी | adverb of place | |
| स्पर्शसङ्घर्षी | affricate | |
| स्पर्शी | stop, plosive | |
| स्वर | vowel | |
| स्वर सन्धि | vowel sandhi | |
| स्वरयन्त्रमुखी | glottal | |
| स्वरान्त धातु | vowel-final root | |
| हलन्त | halanta, virāma (्); also a consonant-final word or syllable | |
| हिज्जे | spelling | |
| हेतु | cause (hetu), counted under करण |
जहाँ व्याकरणविद्हरूको मत फरक छ
अध्यायहरूमा जहाँ व्याकरणविद्, शब्दकोश र पाठ्यपुस्तकको मत फरक परेको छ, त्यहाँ ‘मत फरक छ’ बाकसमा दुवै मत र पाठ्यपुस्तकले लिएको मत दिइएको छ। यहाँ ती सबै बाकस छोटकरीमा छन्, पुस्तककै भागअनुसार। जहाँ मत फरक छ, यस पुस्तकले CDC का पाठ्यपुस्तकको मत लिएको छ, किनभने विद्यार्थीले परीक्षामा त्यही लेख्नुपर्छ; पूरा कुरा लिङ्कमा थिचेर पढ्नुहोस्।
भाग १: भाषा, ध्वनि र अक्षर
- ट वर्ग र च वर्ग कहाँबाट बोलिन्छन्? (वर्ण: उच्चारण स्थान): परम्परागत व्याकरणले संस्कृतको चलनअनुसार च वर्गलाई तालव्य र ट वर्गलाई मूर्धन्य भन्छ (नेपाली बृहत् शब्दकोशले ट लाई मूर्धन्य, र च लाई तालव्य र दन्तमूलीय दुवै भनेको छ)। कक्षा ११ को पाठ्यपुस्तकले नेपालीमा यी दुवै वर्ग दाँतको जराको आसपासबाट बोलिने भएकाले दुवैलाई दन्तमूलीय भन्छ। यस पुस्तकले पाठ्यपुस्तककै वर्गीकरण लिएको छ।
- अं र अः स्वर हुन् कि होइनन्? (वर्ण: अल्पप्राण र महाप्राण): पाठ्यपुस्तकले यी दुईलाई लेख्य स्वरमा गन्छ, त्यसैले लेख्य स्वर १३ हुन्छन्। परम्परागत व्याकरणले यिनलाई स्वर पनि होइन, व्यञ्जन पनि होइन भनेर अयोगवाह भन्छ। यस पुस्तकले पाठ्यपुस्तककै गन्ती लिएको छ।
- ‘अ’ कहाँबाट बोलिन्छ? (वर्ण: नाकबाट बोलिने स्वर): भाषाविद्हरूमध्ये कसैले अ लाई केन्द्रीय र कसैले पश्च स्वर मान्छन्, र मुख कति खुल्छ भन्नेमा पनि मत मिल्दैन। अनिवार्य नेपालीका पाठ्यपुस्तकले स्वरको वर्गीकरण पढाउँदैनन्; कक्षा १२ को ऐच्छिक भाषाविज्ञानले मात्र पढाउँछ। यस पुस्तकको तालिका एउटा प्रचलित व्याख्या मात्र हो, अनिवार्य नेपालीको परीक्षाका लागि कण्ठ गर्नुपर्दैन।
- कुन अक्षर गन्ने? (अक्षर: कवितामा अक्षर गन्ने): भाषाविज्ञानको अक्षर बोलाइमा आधारित छ, त्यसैले घर एक अक्षर हो; छन्दशास्त्रको वर्ण लेखाइमा आधारित छ, त्यसैले परम्परागत छन्दमा घर दुई वर्ण हो। यस पुस्तकले व्याकरणको प्रश्नमा बोलाइअनुसार र छन्द र लयको प्रश्नमा लेखाइअनुसार गन्न भन्छ।
- स्वर सन्धिका नाम (सन्धि: ए, ऐ, ओ, औ पछि अर्को स्वर: अय्, आय्, अव्, आव्): संस्कृत व्याकरणको परम्पराले स्वर सन्धिका पाँच नियमलाई दीर्घ, गुण, वृद्धि, यण् र अयादि भन्छ। कक्षा ११ र १२ का पाठ्यपुस्तकले नियमअनुसार सन्धि विच्छेद गर्न लगाउँछन्, तर यी नाम दिँदैनन् र सोध्दैनन्। परीक्षामा सन्धि विच्छेद नै सोधिन्छ।
भाग २: शब्द
- ‘पसल’ आगन्तुक कि तद्भव? (शब्दस्रोत: शब्दकोशले स्रोत कसरी देखाउँछ?): कक्षा ६, १० र ११ का पाठ्यपुस्तकले पसल लाई नेपालकै अर्को भाषाबाट आएको आगन्तुक शब्द मानेका छन्; नेपाली बृहत् शब्दकोशले संस्कृतको पण्यशाला बाट बनेको तद्भव। यस पुस्तकले परीक्षामा जुन किसिम लेखे पनि कारणसहित लेख्न भन्छ।
- अनुकरणात्मक शब्दको स्रोत के? (शब्दस्रोत: अनुकरणात्मक शब्द): कक्षा १० को पाठ्यपुस्तकले फटाफट, गुटुमुटु जस्ता शब्दलाई मौलिक तद्भव शब्दमा गनेको छ; शब्दकोशले यिनको स्रोतमा [अमू.] (अनुकरण मूल) लेखेर छुट्टै देखाएको छ। यस पुस्तकले परीक्षामा यिनलाई मौलिक (तद्भव) लेख्न भन्छ।
- विभक्ति लागेको शब्द व्युत्पन्न कि रूपायित? (मूल र व्युत्पन्न शब्द: व्युत्पादन र रूपायन): धेरै व्याकरणविद् र अधिकारीको व्याकरणले नयाँ शब्द बनाउने व्युत्पादन र एउटै शब्दको वाक्यअनुसारको रूप बनाउने रूपायन छुट्याउँछन्; कक्षा ९ र ११ का पाठ्यपुस्तक र कक्षा ९ को शिक्षक निर्देशिकाले दुवैलाई व्युत्पन्नमा गनेका छन्। यस पुस्तकले दुई प्रक्रिया छुट्याएको छ, तर परीक्षामा रामको लाई व्युत्पन्न भन्दा गल्ती हुँदैन।
- ‘कु’ र ‘स’ कुन स्रोतका? (उपसर्ग: स्रोतअनुसार उपसर्ग): कक्षा ११ को पाठ्यक्रम र पाठ्यपुस्तकको अभ्यासले कु र स लाई अ, बे, गैर जस्ता उपसर्गसँगै एउटै समूहमा राखेका छन्; शब्दकोशले दुवैलाई संस्कृतबाट आएको [सं.] भनेको छ। यस पुस्तकले कु लाई तत्सम भन्दा कारण पनि लेख्न भन्छ।
- ‘अन’ तद्भव कि आगन्तुक? (उपसर्ग: स्रोतअनुसार उपसर्ग): नेपाली बृहत् शब्दकोशअनुसार अनमोल को अन संस्कृतको अन् बाट बनेको तद्भव उपसर्ग हो; अधिकारीको व्याकरणले यसलाई बे, ना, गैर सँगै अरबी–फारसीबाट आएको आगन्तुक मानेको छ; पाठ्यपुस्तकले स्रोत छुट्याउँदैन। यस पुस्तकले शब्दकोशअनुसार तद्भव मानेको छ।
- प्रति, यथा, आ: उपसर्ग कि समास? (समास: अव्ययीभाव समास): ‘प्रति’ र ‘यथा’ उपसर्गका सूचीमा पनि पर्ने भएकाले ‘प्रतिदिन’ लाई कतै उपसर्ग लागेर बनेको शब्द भनिन्छ; पाठ्यपुस्तकहरूले यस्ता शब्दलाई समासको अभ्यासमा राखेर विग्रह माग्छन्। अधिकारीको व्याकरणले ‘हरेक …’ गरी विग्रह हुने प्रतिदिन लाई समास पनि मान्छ, तर प्रतिबिम्ब र ‘आ’ लागेका आजीवन जस्ता शब्दलाई उपसर्गबाट बनेका। यस पुस्तकमा समासको प्रश्नमा अव्ययीभाव समास, उपसर्गको प्रश्नमा ‘प्रति’ उपसर्ग।
- समास छ प्रकार कि चार? (समास: अव्ययीभाव समास): संस्कृत व्याकरणको परम्परामा कर्मधारय र द्विगु तत्पुरुषकै भेद भएकाले समास चार प्रकारका गनिन्छन्; कक्षा ११ र १२ को पाठ्यक्रमले छओटैलाई छुट्टाछुट्टै नाम दिएको छ। यस पुस्तकले छ प्रकार मानेको छ।
- ‘सर’, ‘झै’, ‘मर’ भएका शब्द: आंशिक कि परिवर्तित? (द्वित्व: द्वित्व हुने तरिका): कक्षा ७ को पुस्तक र शिक्षक निर्देशिकाले झैझगडा, मरमसला लाई ससानो सँगै आंशिक द्वित्वमा राखेका छन्; अगाडिको अंश अलि बदलिएको देखेर यिनलाई परिवर्तित द्वित्व मान्ने तर्क पनि गरिन्छ। यस पुस्तकले CDC कै मत लिएर आंशिक द्वित्व मानेको छ।
भाग ३: पदवर्ग
- विभक्ति लागेको नाम: नाम कि क्रियायोगी? (पदवर्ग: पदवर्ग चिन्ने तरिका): SEE को विशिष्टीकरण तालिका (२०८०) को नमुना उत्तरकुञ्जिकाले ‘कार्यालयबाट’ जस्तो पदलाई क्रियायोगी भनेको छ; पाठ्यपुस्तकका अभ्यासले घरमा, खेतबाट जस्ता पदलाई क्रियायोगी भनेका छैनन्। यस पुस्तकमा विभक्ति लागेको नाम नाम नै हो; तर SEE को विचलनको प्रश्नमा अरू पद नभेटिए “क्रियायोगी (नामबाट विचलन)” लेख्नु सुरक्षित हुन्छ।
- ‘तर’ तीन वर्गमा: विचलन कि तीन शब्द? (पदवर्ग: पदवर्ग विचलन): कक्षा १० को पाठ्यपुस्तकले संयोजक, नाम र क्रियापदका रूपमा आउने ‘तर’ लाई पदवर्ग विचलनकै अभ्यासमा राखेको छ; अर्को मतमा यी उस्तै लेखिने तीन फरक शब्द हुन्, र शब्दकोशमा तिनका छुट्टाछुट्टै प्रविष्टि छन्। यस पुस्तकले परीक्षामा पाठ्यपुस्तकले जस्तै प्रयोगअनुसारको वर्ग लेख्न भन्छ।
- मेरो, तिम्रो, आफ्नो कुन पदवर्ग? (सर्वनाम: सर्वनाम कि विशेषण?): कतिपय व्याकरणले ‘म’ मा सम्बन्ध विभक्ति लागेर बनेको ‘मेरो’ लाई सर्वनामकै रूप मान्छन्; पाठ्यपुस्तक (कक्षा ६ र ८), कक्षा ६ को शिक्षक निर्देशिका र शब्दकोशले विशेषण भन्छन्। यस पुस्तकले विशेषण मानेको छ: “सर्वनाम ‘म’ बाट बनेको विशेषण (भेदक)”।
- ‘पनि’ र ‘मात्र’: निपात कि अरू? (अव्यय: निपात): कक्षा ७ र ११ का पुस्तकले पनि लाई संयोजकमा राखेका छन्, र कक्षा ६ ले मात्र लाई नामयोगी कि क्रियायोगी भनी छुट्याउन लगाउँछ। यस पुस्तकमा ‘रिसाए पनि’ जस्तो दुई कुरा जोड्ने पनि संयोजक हो, र भाव मात्र थप्ने पनि र मात्र निपात हुन्।
भाग ४: व्याकरणिक कोटि
- लिङ्ग, वचन, पुरुष: छुट्टै कि सङ्गतिभित्र? (लिङ्ग, वचन र पुरुष: समूह र द्रव्य जनाउने नामको वचन): पाठ्यपुस्तकले लिङ्ग, वचन, पुरुष र आदरलाई छुट्टाछुट्टै पढाउँछ; अधिकारीको व्याकरणले यी चारैलाई ‘सङ्गति’ अध्यायमा राखेर मेलको कोणबाट हेर्छ। यस पुस्तकले पाठ्यपुस्तककै विभाजन लिएको छ, र मेलका नियम पदसङ्गति अध्यायमा राखेको छ।
- कुन पुरुष ‘प्रथम’? (लिङ्ग, वचन र पुरुष: पुरुष): नेपाली पाठ्यपुस्तक र अधिकारीको व्याकरण दुवैले बोल्ने व्यक्ति (म, हामी) लाई प्रथम पुरुष भन्छन्; संस्कृत व्याकरणमा गन्ती उल्टो छ: अरू व्यक्ति प्रथम, सुन्ने मध्यम र बोल्ने उत्तम पुरुष। यस पुस्तकले पाठ्यपुस्तककै नाम लिएको छ।
- आदरका तीन तह कि छ तह? (आदर: सम्बोधन र आदर देखाउने शब्द): पाठ्यपुस्तक र पाठ्यक्रमले सामान्य, मध्यम र उच्च गरी तीन तह पढाउँछन्; अधिकारीको व्याकरणले आदर रहित, मध्यम, उच्च, विशेष, उच्चतर र उच्चतम गरी छ तह छुट्याउँछ। यस पुस्तकले तीन तह मानेको छ, र हजुर लाई पाठ्यपुस्तकले जस्तै उच्च आदरमा राखेको छ।
- तीन काल कि दुई? (काल: भूत र अभूत): कक्षा ६ देखि १० सम्मका पाठ्यपुस्तकले भूत, वर्तमान र भविष्यत् गरी तीन काल पढाउँछन्; कक्षा १२ को पाठ्यपुस्तक, पाठ्यक्रम र अधिकारीको व्याकरणले भूत र अभूत गरी दुई भाग देखाएर अभूतभित्र वर्तमान र भविष्यत् राख्छन्। दुवै मत एकअर्काका विरोधी होइनन्; परीक्षामा आफ्नो कक्षाको पाठ्यपुस्तकको नाम लेख्ने।
- पक्ष पाँच कि चार? (पक्ष: सामान्य पक्ष): पाठ्यपुस्तकले सामान्यलाई पनि पक्ष मानेर पाँच पक्ष गन्छन्; अधिकारीको व्याकरणमा अपूर्ण, पूर्ण, अभ्यस्त र अज्ञात गरी चार मात्र छन्। यस पुस्तकले पाठ्यपुस्तककै पाँच पक्ष राखेको छ।
- आज्ञा र इच्छा: दुई भाव कि एउटै? (भाव: इच्छार्थ): पाठ्यपुस्तकले आज्ञार्थ र इच्छार्थलाई छुट्टाछुट्टै भाव मान्छन्; अधिकारीले यी दुवैलाई एउटै विध्यर्थ भाव मानेर सबै पुरुषका रूप एउटै तालिकामा राखेका छन्। यस पुस्तकले पाठ्यपुस्तककै दुई भाव लिएको छ।
- सङ्केतार्थ: सर्तको रूप कि परिणामको? (भाव: सङ्केतार्थ): पाठ्यपुस्तकले सर्त राख्ने -ए रूप (पढे, परे) लाई सङ्केतार्थ मान्छन्; अधिकारीले परिणाममा आउने पढ्ने थियो, पढ्थ्यो जस्ता रूपलाई। यस पुस्तकले पाठ्यपुस्तककै विचार लिएको छ; दुवै मतमा सर्त र परिणाम भएको पूरा वाक्य सङ्केतार्थकै हो।
- ‘गर्नुहुन्न’ कि ‘गर्नुहुँदैन’? (करण र अकरण: संयुक्त क्रियामा अकरण): बोलीमा आदरार्थी अकरणका दुवै रूप सुनिन्छन्; पाठ्यपुस्तकले आदरार्थी अकरणमा -नुहुन्न र ‘गर्नु नहुने’ (मनाही) अर्थमा -नुहुँदैन लेखेका छन्, कक्षा ९ को शिक्षक निर्देशिकाले भने एक ठाउँमा जानु हुँदैनथ्यो दिएको छ। यस पुस्तकले पाठ्यपुस्तककै चलन लिएको छ: गर्नुहुन्न।
- ‘पाहुना बोलाइए’ कि ‘पाहुनालाई बोलाइयो’? (वाच्य: अर्थ नबिग्रने गरी वाच्य बदल्ने): कक्षा ८ को पुस्तकको नियमअनुसार कर्मवाच्यमा कर्मको लाई हट्छ र क्रियापद कर्मअनुसार हुन्छ; बोलीचाली र समाचारमा लाई राखेर एकवचन क्रिया लेखिएको पनि भेटिन्छ। यस पुस्तकले पाठ्यपुस्तकको नियम लिएको छ।
- पठाउनु सामान्यार्थक कि प्रेरणार्थक? (प्रेरणार्थक: प्रेरणार्थक नबन्ने वा फरक तरिकाले बन्ने क्रिया): शब्दकोशले पठाउनु लाई सकर्मक र प्रेरणार्थक दुवै भनेको छ; ‘पठ्नु’ धातु नभएकाले हाम्रो कक्षा १० को व्याख्याले यसलाई सामान्य प्रयोग भनेको छ, र पाठ्यपुस्तकले यसको वर्गीकरण छुट्टै गरेको छैन। यस पुस्तकले यसलाई सामान्य क्रिया मानेको छ।
- कति कारक, कति विभक्ति? (कारक र विभक्ति: अधिकरण: काम हुने ठाउँ): पाठ्यपुस्तकले छ कारक र सात विभक्ति भन्छ, र संस्कृतको परम्पराजस्तै षष्ठीलाई कारक मान्दैन; कतिपय व्याकरणले सम्बोधनलाई छुट्टै विभक्ति वा कारक गन्छन्, र अधिकारीको व्याकरणले कारकलाई ‘आर्थी भूमिका’ का आधारमा बुझाउँछ। यस पुस्तकले पाठ्यपुस्तककै छ कारक र सात विभक्ति लिएको छ।
- ‘का लागि’ विभक्ति हो कि नामयोगी? (कारक र विभक्ति: अधिकरण: काम हुने ठाउँ): कक्षा ८ को पाठ्यपुस्तकले लागि र निम्ति लाई चतुर्थी विभक्तिका चिह्न भनेको छ; कतिपय व्याकरणमा यिनलाई नामयोगी भनिन्छ, र अधिकारीको व्याकरणले ‘विभक्ति / नामयोगी’ भनी दुवैतिर राख्छ। यस पुस्तकमा कारक चिनाउँदा ‘साथीका लागि’ सम्प्रदान कारक, चतुर्थी विभक्ति।
- ‘पढेकी छ’ कि ‘पढेकी छे’? (पदसङ्गति: कर्ता र क्रियापदको सङ्गति): कक्षा ८ को पाठ्यपुस्तकले -एकी पछि सहायक क्रियापद पुलिङ्गकै राखेको छ (पढेकी छ); अधिकारीको व्याकरणले वर्तमानमा पढेकी छे पनि आउन सक्ने बताउँछ। यस पुस्तकले पाठ्यपुस्तककै छ लिएको छ।
- ‘कर्ता र क्रिया’ कि ‘उद्देश्य र विधेय’? (पदसङ्गति: चार प्रकारको सङ्गति): कक्षा ९ को पाठ्यपुस्तकले ‘कर्ता र क्रियाबिचको सङ्गति’ भन्छ, कक्षा ११ को विशिष्टीकरण तालिकाले यसैलाई ‘उद्देश्य र विधेयका आधारमा’ सङ्गति; अधिकारीको व्याकरणले भेदकलाई विशेषणकै रूप मानेर त्यहीँ राख्छ। यस पुस्तकमा कक्षा ९ र १० का लागि पाठ्यपुस्तकका चार नाम, कक्षा ११ र १२ मा ‘उद्देश्य र विधेय’ पनि।
- सङ्केतार्थ कुन रूप हो? (धातुरूपावली: सङ्केतार्थ): पाठ्यपुस्तकले सर्त राख्ने -ए रूप (पढे) लाई सङ्केतार्थ मान्छ; अधिकारीको व्याकरणले सर्त पूरा नभएको परिणाम देखाउने पढ्ने थियो, पढ्थ्यो लाई। परीक्षामा पाठ्यपुस्तककै -ए रूप लेख्ने।
भाग ५: वाक्य
- किनभने र त्यसैले: संयुक्त कि मिश्र? (वाक्यका प्रकार: जटिल वाक्य: सापेक्ष र निरपेक्ष संयोजक): कक्षा ८ र १० का शिक्षक निर्देशिका र SEE को नमुना उत्तरले किनभने, त्यसैले ले जोडेका वाक्यलाई संयुक्त भनेका छन्; अधिकारीको व्याकरणले किनभने ले जोडेको वाक्यलाई मिश्र मान्छ। यस पुस्तकले पाठ्यपुस्तक र निर्देशिकाकै मत लिएको छ: संयुक्त।
- ‘जटिल वाक्य’ भनेको के? (वाक्यका प्रकार: जटिल वाक्य: सापेक्ष र निरपेक्ष संयोजक): कक्षा १० को पुस्तकले संयुक्त र मिश्र दुवैलाई जटिल वाक्य भनेको छ; अधिकारीको व्याकरणमा जटिल, संश्लिष्ट वा गर्भित वाक्य भनेको मिश्र वाक्य मात्र हो। यस पुस्तकले प्रश्नमा दिइएको उदाहरण हेरेर अर्थ बुझ्न भन्छ।
- असमापिका क्रिया भएको वाक्य सरल कि मिश्र? (वाक्यका प्रकार: असमापिका उपवाक्य): पाठ्यपुस्तकले एउटै समापिका क्रिया भएको वाक्यलाई सरल भन्छन्, त्यसैले ‘बाटो बिग्रिएकाले बस ढिलो आयो’ सरल वाक्य हो; अधिकारीको व्याकरणले असमापिका उपवाक्य भएका यस्ता वाक्यलाई पनि मिश्र मान्छ। यस पुस्तकले पाठ्यपुस्तककै मत लिएको छ।
- ‘-एर’ ले जोडिएको वाक्य सरल कि मिश्र? (संश्लेषण र विश्लेषण: जोड्दा र फुटाउँदा के के बदलिन्छ): पाठ्यपुस्तक र कक्षा ८ को परीक्षाको नमुना उत्तरले जतिसुकै -एर, -ई आए पनि एउटै समापक क्रिया भएको वाक्यलाई सरल मानेका छन्; अधिकारीको व्याकरणले यस्ता वाक्यलाई मिश्र वाक्यकै एउटा किसिम, संश्लिष्ट वाक्य, भनेको छ। यस पुस्तकले पाठ्यपुस्तककै मत लिएको छ: सरल वाक्य।
- प्रत्यक्ष कथन भएको वाक्य कुन किसिमको? (कथन: बदल्ने तीन शैली): पाठ्यपुस्तकले कथनलाई वाक्यान्तरणको एउटा किसिमका रूपमा मात्र पढाउँछ; अधिकारीको व्याकरणले ‘X ले भन्यो, “…”’ जस्तो वाक्यलाई मिश्र वाक्य मान्छ, जसमा भनाइ ‘भन्नु’ को कर्मको काम गर्ने आश्रित उपवाक्य हो। यस पुस्तकले कथनलाई पाठ्यपुस्तकले जस्तै पढाएको छ; परीक्षामा कथनको प्रश्नमा वाक्यको किसिम सोधिँदैन।
भाग ६: शुद्ध लेखाइ
- ‘जस्तो’ नामयोगी हो कि होइन? (पदयोग र पदवियोग: ‘जस्तो’, ‘झैँ’ र ‘सरि’): जस्तो र झैँ लाई नामयोगी मान्दा जोडेर (फूलजस्तो) लेख्नुपर्ने हुन्छ, र कतै त्यसरी लेखिएको भेटिन्छ पनि; शब्दकोशले जस्तो लाई विशेषण र क्रियायोगी भनेको छ र झैँ का उदाहरण छुट्टै लेखेको छ, पाठ्यपुस्तकले पनि छुट्टै लेख्छन्। यस पुस्तकले छुट्टै लेख्छ, तर जोडेर लेखिएको गल्ती मानिहाल्नु हुँदैन।
- ‘चारओटा’ कि ‘चारोटा’? (पदयोग र पदवियोग: सङ्ख्या, ‘ओटा’ र ‘जना’): शब्दकोशले ओटा का उदाहरणमा चारोटा, पाँचोटा दिएको छ, तर अर्थ लेख्दा आफैँ पाँचओटा लेखेको छ; पाठ्यपुस्तकले सधैँ चारओटा लेख्छन्। यस पुस्तकले चारओटा लेख्छ।
- ‘पढ्नु होस्’ कि ‘पढ्नुहोस्’? (पदयोग र पदवियोग: पाठ्यपुस्तक आफैँ नमिलेका ठाउँ): अधिकारीको व्याकरणले आदरार्थी आज्ञालाई पढ्नु होस् छुट्टै लेख्छ; शब्दकोशको संशोधन समिति र पाठ्यपुस्तकले पढ्नुहोस् जोडेर। यस पुस्तकले जोडेर लेख्छ।
- ‘आमा-बुबा’ कि ‘आमाबुबा’? (लेख्य चिह्न: योजक (-)): शब्दकोशले आमाबुबा, दालभात जस्ता धेरै जोडी शब्द जोडेरै राखेको छ; कक्षा ६ को पाठ्यपुस्तकले योजक सिकाउँदा यस्तै जोडी शब्द दिएको छ। यस पुस्तकमा दुवै शुद्ध छन्; एउटै लेखमा एउटै तरिका अपनाउने।
- निर्देश कुन कक्षामा? (लेख्य चिह्न: निर्देश (—)): कक्षा ६–८ को पाठ्यक्रमले कक्षा ८ मा र कक्षा ९ को पाठ्यक्रमले ‘निर्देशक’ नाममा यो चिह्न राखेका छन्, तर पाठ्यपुस्तकमा यसको नाम लिएर अभ्यास कक्षा १० को पाठ १६ मा मात्र छ। कक्षा ८ र ९ मा पनि परीक्षाको अनुच्छेदमा यो देखिन सक्छ।
- ‘जो कि’ गल्ती हो? (सामान्य गल्ती: वर्णन गर्ने भाग नामभन्दा अगाडि): पत्रपत्रिका र भाषणमा ‘जो कि’ भेटिन्छ, र यसलाई व्याकरणको नियम तोडेको भन्न सकिँदैन; कक्षा ६ देखि १२ सम्मका पाठ्यपुस्तकमा भने यो एक ठाउँमा पनि छैन, तिनले नामअघिको कृदन्त वा जुन … त्यो लेख्छन्। यस पुस्तकले परीक्षा र औपचारिक लेखाइमा पाठ्यपुस्तककै ढाँचा लिन भन्छ।
- ‘भूमिका खेल्नु’ (सामान्य गल्ती: शब्दशः उल्था गरिएका पदावली): कक्षा १० को एउटा पाठमा ‘भूमिका खेलेको छ’ आएकाले यसलाई गल्ती भन्न मिल्दैन; तर पाठ्यपुस्तकहरूले धेरैजसो ठाउँमा भूमिका निर्वाह गर्नु लेखेका छन्, र नाटकबाहेकको ‘भूमिका खेल्नु’ अङ्ग्रेजीको ‘play a role’ को उल्था जस्तो सुनिन्छ। यस पुस्तकले भूमिका निर्वाह गर्नु वा योगदान दिनु लेख्न भन्छ।
यी तथ्य कहाँबाट लिइएका हुन्
- पारिभाषिक शब्द र कक्षा: यस पुस्तकका अध्याय १ देखि ३९ र परिशिष्ट क; हरेक शब्द त्यसलाई परिभाषा दिने अध्यायको खण्डबाट लिइएको हो, र त्यसको कक्षा त्यही खण्डको कक्षा हो। त्यो कक्षा पाठ्यपुस्तकको कुन पाठ र पृष्ठबाट आयो भन्ने कुरा त्यस अध्यायको स्रोतमा छ।
- अरू पाठ्यक्रमका कक्षा: जुन कुरा CDC का अनिवार्य नेपालीका पुस्तकले पढाउँदैनन् तर कक्षा १२ सम्मको अर्को पाठ्यक्रमले पढाउँछ, त्यसको कक्षा त्यही पाठ्यक्रमको हो: CDC को ऐच्छिक भाषाविज्ञान, कक्षा ११ (Lin. 217) र १२ (Lin. 218) को पाठ्यक्रम (माध्यमिक शिक्षा पाठ्यक्रम २०७६, कक्षा ११–१२, भाग ३, ऐच्छिक विषय, PDF पृष्ठ १३०–१३८) र कक्षा १२ को विशिष्टीकरण तालिकाको नमुना प्रश्न (पृष्ठ १५३–१५४): स्वरको वर्गीकरण, विभेदक वर्ण, संवर्ण, उच्चारण अवयव, रूपिम, पूर्णार्थ र प्रकार्यात्मक शब्द, अर्थका सम्बन्ध, उपवाक्य, पदावली, प्रयुक्ति, साङ्केतिक भाषा, भाषा परिवर्तन; भारतको NIOS को माध्यमिक नेपाली (२३१, पृष्ठ ७२–७४): बलाघात, तान र काकु; भारतको CBSE कक्षा १० (पृष्ठ ४–५) र असमको SEBA कक्षा १० (पृष्ठ १०२): शुद्धीकरण; कक्षा ९ को शिक्षक निर्देशिका (पृष्ठ २६२): ‘-न लगाउनु’ ले बन्ने प्रेरणार्थक। कुनै पाठ्यक्रमले कक्षा १२ सम्म नपढाउने कुरा ‘थप’ हुन्। केही नयाँ पङ्क्तिका लिङ्क अध्यायसम्म मात्र पुग्छन्, किनभने ती कुरा अध्यायमा भर्खर थपिँदै छन्।
- अर्को नाम: अध्यायहरूमा उल्लेख भएका पाठ्यपुस्तक, विशिष्टीकरण तालिका र हेमाङ्गराज अधिकारीको समसामयिक नेपाली व्याकरण का नाम।
- अङ्ग्रेजी नाम: Wikipedia का Nepali grammar (विभक्ति, अभ्यस्त भूत, आज्ञार्थ, आदरका तह, क्रियामूल र कृदन्तका अङ्ग्रेजी नाम), Sanskrit compound (समासका प्रकारका नाम: determinative, descriptive, numerative, co-ordinative, possessive, adverbial) र Kāraka (कारकलाई thematic role सँग दाँजिएको) लेख हेरिएका छन्। Nepali grammar का क्रियाका तालिकाले गरूँ, गरोस्, गर्नुहोस् जस्ता रूपलाई injunctive र गर्ला जस्ता रूपलाई probable future भनेका छन्; त्यसैले इच्छार्थ, विध्यर्थ र सम्भावनार्थका पङ्क्तिमा ती नाम दिइएका छन्। अज्ञात पक्षको -एछ रूपलाई अङ्ग्रेजीको भाषाविज्ञानमा evidential र mirative भनिन्छ (जस्तै John Peterson को लेख Evidentials, inferentials and mirativity in Nepali, Linguistics of the Tibeto-Burman Area २३:२, सन् २०००; लेख आफैँ हेर्न पाइएन, शीर्षक मात्र)। अधिकारीको व्याकरणको अङ्ग्रेजी अनुवाद र अङ्ग्रेजीमा लेखिएका नेपाली व्याकरणका पुस्तक हेर्न पाइएन, त्यसैले बाँकी अङ्ग्रेजी नाम भाषाविज्ञानमा सामान्य रूपमा चल्ने नाम हेरेर यस पुस्तकले आफैँ छानेका हुन्।
- मत फरक: अध्याय २, ३, ४, ५, ६, ७, ९, १०, १२, १४, १७, १८, १९, २१ देखि २८, ३१, ३२, ३३, ३६, ३७, ३९ र परिशिष्ट कका ‘मत फरक छ’ बाकस; हरेक मतको स्रोत ती बाकस र तिनका अध्यायको स्रोतमा छ।
गल्ती भेटे हामीलाई भन्नुहोस्।
